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Perplexity AI का गूगल क्रोम को खरीदने का 34.5 बिलियन डॉलर का ऑफर – पूरी जानकारी

Perplexity AI

प्रस्तावना

टेक इंडस्ट्री को हिला देने वाली खबर यह है कि Perplexity AI ने दुनिया के सबसे लोकप्रिय वेब ब्राउज़र Google Chrome को खरीदने के लिए करीब 34.5 बिलियन डॉलर का ऑफर दिया है। यह खबर ऐसे समय पर आई है जब गूगल अमेरिका में चल रहे एंटीट्रस्ट केस का सामना कर रहा है और कोर्ट गूगल को क्रोम को बेचने के लिए मजबूर कर सकता है।


यह कब हुआ?

  • यह खबर 12–13 अगस्त 2025 को सामने आई।
  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Perplexity AI ने गूगल को अनसोलिसिटेड ऑफर दिया।
  • यह कदम इसलिए खास है क्योंकि जल्द ही जज अमित मेहता गूगल के खिलाफ एंटीट्रस्ट केस में फैसला सुनाने वाले हैं, जिसमें Chrome divestiture (क्रोम को अलग करने) का विकल्प भी शामिल हो सकता है।

फाइनेंशियल डिटेल्स

  • इस समय Perplexity AI की वैल्यूएशन करीब 18 बिलियन डॉलर है और अगली फंडिंग में इसके 20 बिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है।
  • इसके बावजूद 34.5 बिलियन डॉलर का ऑफर देना एक बहुत ही बोल्ड और रिस्की फैसला माना जा रहा है।
  • एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ ब्राउज़र खरीदने का मामला नहीं है, बल्कि सर्च इंजन और ब्राउज़र इकोसिस्टम पर पकड़ बनाने की बड़ी रणनीति है।

ऑफर में क्या था?

Perplexity AI की ओर से दिए गए ऑफर में कुछ खास बातें शामिल थीं:

  • Chromium को ओपन-सोर्स बनाए रखना
  • अगले दो साल में 3 बिलियन डॉलर का निवेश
  • Google Search को डिफ़ॉल्ट सर्च इंजन बनाए रखना ताकि गूगल का रेवेन्यू मॉडल सुरक्षित रहे

इससे साफ है कि Perplexity Labs सिर्फ Chrome खरीदना नहीं चाहता बल्कि यूज़र्स और रेगुलेटर्स को भरोसा दिलाना चाहता है कि सर्विस की निरंतरता बनी रहेगी।


इसमें कौन-कौन शामिल थे?

  • Perplexity AI founder और CEO Aravind Srinivas (अरविंद श्रीनिवास) ने खुद यह ऑफर गूगल के सामने रखा।
  • खबरें ये भी हैं कि OpenAI, Yahoo, और Apollo Global Management भी Chrome खरीदने में दिलचस्पी दिखा सकते हैं।
  • वहीं, इस पूरी डील में अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) और जज अमित मेहता की भूमिका अहम है, क्योंकि वही तय करेंगे कि गूगल को क्रोम बेचना पड़ेगा या नहीं।

इंडस्ट्री रिएक्शन

  • कुछ लोगों का मानना है कि यह सिर्फ एक पब्लिसिटी स्टंट है, क्योंकि एक छोटे से AI tool स्टार्टअप के लिए इतनी बड़ी डील करना लगभग नामुमकिन लगता है।
  • वहीं, कई विशेषज्ञ इसे एक ब्रांडिंग स्ट्रैटेजी मानते हैं, जिससे Perplexity को पूरी दुनिया में चर्चा मिल रही है।
  • यह कदम यह भी दिखाता है कि अब AI बनाम Big Tech की जंग और तेज हो रही है।

निष्कर्ष

चाहे गूगल इस ऑफर को स्वीकार करे या नहीं, इतना तो तय है कि Perplexity AI ने पूरी टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है
यह डील अगर होती है तो ब्राउज़र मार्केट में बड़ा बदलाव आएगा और यह साबित करेगा कि अब AI कंपनियाँ भी बिग टेक के मुकाबले खड़ी हो सकती हैं

👉 यानी आने वाले समय में, Perplexity AI vs ChatGPT की जंग के साथ-साथ, Perplexity vs Google Chrome भी चर्चा में रहेगा।

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